' SHAJAR MIZAJ' THE BEAUTIFUL COLLECTION OF GHAZALS BY ATUL AJNABI & PUBLISHED BY SHILPAYAN(DELHI).RENOWNED SHAIR LIKE NIDA FAZLI & SHAKIL GWALIORI HAVE WRITTEN ITS PREFACE.Prof.WASIM BARELVI HAS BESTOWED HIS BLESSINGS UPON THIS COLLECTIN.SHAJAR MIZAJ HAVE BEEN REVIEWED IN WIDLY ACCLAIMED MAGAZINES LIKE INDIA TODAY, AHA ZINDGI,Sr.INDIA Etc.*********
ATUL AJNABI RECITING HIS GHAZALS IN A LITRARY PROGRAM WITH Prof.WASIM BARELVI, Dr. NASIM NIKHAT AND WASIF FAROOQI.
मैं आंसुओं का समंदर भी पर कर लेता
बस एक लम्हे में दुनिया बदलने वाली थी
अगर वो मेरा ज़रा इंतिज़ार कर लेता
बचाये रहती है शा इस्तागी यहाँ वरना
गुरूर कब का हमारा शिकार कर लेता
तुम्हारे शहर में गर इक दुकान मिल जाती
मैं खुशबुओं का वहां कारोबार कर लेता
हुनर बताते अगर उसके ऐब को हम भी
तो दोस्तों में हमें भी शुमार कर लेता
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करम है उसका कोई बद्दुआ नहीं लगती
मेरे चिराग जलें तो हवा नहीं लगती
तुम्हारे प्यार की ज़ंजीर में बंधा हूँ मैं
सज़ा ये कैसी मिली है सज़ा नहीं लगती
किसी से प्यार करो और तजरुबा कर लो
ये रोग ऐसा है जिसमें दवा नहीं लगती
बस एक लम्हा सभी कुछ बदल के रख देगा
किसी को मौत की आहट पता नहीं लगती
ये ज़िंदगी जो तुम्हारी नज़र में कुछ भी नहीं
मेरी निगाह से देखो तो क्या नहीं लगती
फकीर सारे जहाँ को दुआएं देते हैं
बस इक हमारे ही दर पर सदा नहीं लगती

